Monday, August 13, 2012

पिट्टसबर्ग की नर्स - निस्वार्थ सेवा

हमें लंग्ज ट्रांसप्लांट के लिए
जांच करवानी थी लेकिन
जांच डिपार्टमेंट आगे का
समय दे रहा था 

मनीष  अपनी तरफ से कोशिश 
कर रहा था लेकिन किसी 
भी तरह से काम बन 
नही रहा था ।

मनीष कुछ चिंतित खड़ा था
उधर से  नर्स "रोज़" आई
उसने  ने पूछा-क्या बात है
कुछ उदास लगता है।

मनीष ने परेसानी बताई
रोज़ बोली चिंता मत करो
मेरा दोस्त इसमें काम करता है।

आधा घंटे बाद रोज़ का मसेज आया
कल सुबह साढ़े छ बजे चले जाना
हमारे आश्चर्य की सीमा नहीं रही ।

रोज़ की नम्रता और निस्वार्थ
सेवा भाव से हम द्रवित हो गये
लेकिन रोज गोड ब्लेस्ड यू कहती रही ।

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