Friday, January 15, 2016

हर नर में नारायण तुम हो।

तन में तुम हो मन में तुम हो
जीवन के हर कण में तुम हो 
मंदिर जाकर क्या होगा जब 
हर नर में नारायण तुम हो।  

तुमसे मिलने पाया जीवन 
लेकिन मुझको लगता बंधन 
जीवन मुक्त करो प्रभु मोरे 
दे दो दर्शन अब दुःख भंजन। 

ध्यान धरूँ प्रभु के चरणों में 
पावुं आनंद प्रभु के चरणों में 
क्या रखा काबा काशी में 
मिले शान्ति प्रभु के चरणों में। 

दिया मुझे उत्तम से उत्तम 
सब कुछ देने में तुम सक्षम 
नहीं चाहिए धन और दौलत
तुम हो मेरे, है क्या यह कम।




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