शान्तम् सुखाय
Saturday, March 28, 2026
किसी को नहीं पता
काश होता अमीर
अगर पिता
अच्छा वर मिलता।
आँखे हुई सजल
डोली चढ़ी जो
वो बेटी थी उसकी।
किसी को मत कहो
कड़वा तीखा
जो मिले पीते रहो।
बेतहाशा भागते
मंजिल कहाँ
किसी को नहीं पता।
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