तुम्हारी यादें
तुम्हारी बातें
तुम्हारे शब्द
मुझे मजबूर करते हैं
बार-बार लिखने के लिए।
कलम अपने आप
चलने लगती है
जैसे कोई
हाथ पकड़
लिखवा रहा हो।
महसूस करने लगता हूँ
तुम्हें अपने अंदर
अपने पास में
अपने सामने
और अपने चारों तरफ।
तुम्हारी यादें ही अब
मेरी अमानत है
जिन्हें संजोकर रखता हूँ
और जिंदगी के सफर में
लिखता रहता हूँ।
तुम्हारे शब्द
मुझे मजबूर करते हैं
बार-बार लिखने के लिए।
कलम अपने आप
चलने लगती है
जैसे कोई
हाथ पकड़
लिखवा रहा हो।
महसूस करने लगता हूँ
तुम्हें अपने अंदर
अपने पास में
अपने सामने
और अपने चारों तरफ।
तुम्हारी यादें ही अब
मेरी अमानत है
जिन्हें संजोकर रखता हूँ
और जिंदगी के सफर में
लिखता रहता हूँ।
No comments:
Post a Comment