जब बच्चे मेरी बात
नहीं सुनते हैं,
और मेरी ही गलतियां
निकालने लगते हैं।
तब मैं चुप रह कर
उनकीु बातें सुन लेता हूँ,
और ग्लानि से नयन
निचे कर लेता हूँ।
मैं शर्मशार होकर
माफ़ी माँग लेता हूँ,
और बिना किसी तर्क के
मुकदमा हार जाता हूँ।
इन घटनाओं से
मैं उम्र को लांघ जाता हूँ,
और समय से पहले
बुड्ढा हो जाता हूँ।