Thursday, June 25, 2026

       कानून 
एक को मारने वाला 
जेल की सलाखों 
के पीछे मिलेगा,
मगर हजारों की 
मौत का जिम्मेदार 
फाइव स्टार होटलों में 
युद्ध विराम और 
शांति समझौता 
करता मिलेगा। 
       **

     चाहत 
पेड़ की चाहत 
ठंडी बहती हवा 
उसके पास ठहर जाए,
मगर हवा की चाहत 
पेड़ उसके बाहुपास में 
बँध जाए। 
    **
    
      सुबह 
आज कल 
सूर्योदय के बाद भी 
घरों में सुबह नहीं आती, 
वो आठ बजे 
चाय की आवाज  
सुनाने के बाद ही 
सुबह का आभास देती। 
        **
   
          बंशी
श्याम की बंशी पर 
राधा का मन-मयूर तो 
नाचने लगता है,
मगर मीरा के आँखों से 
अश्रुपात होने लगता है।  


Saturday, June 6, 2026

एक दशक बीत गया


तुम्हारे संग-सफर में कुछ तो जरूर था 
तेरी यादों को आज तक भुलाया न गया। 

तुम्हारी आँखों की चमक ओ शोख हंसी 
तुम्हारा नाजोअंदाज आँखों में बस गया। 

संभव नहीं जिंदगी में भूल पाउँगा कभी 
लिखना याद करने का बहाना बन गया।     

क्यों मुझे तन्हा छोड़ गई उम्र भर के लिए 
एक झलक के लिए मैं तड़पता रह गया। 

मेरे दिल की धड़कन अब भी थमी नहीं 
तुम को बिछुड़े तो एक दशक बीत गया।  













Friday, June 5, 2026

नज़रिया और बदलाव

जीवन 
मरघट तक का 
सफर है 
जहाँ  सिर्फ शवों का 
इन्तजार है। 
  
*
अन्तर 
कानों से सुनी राग 
मधुर होती है 
मगर अनहद नाद 
मधुरतम होती है। 

*
संसार 
जहाँ मनुष्य कभी 
ईश्वर बनता है 
और कभी ईश्वर 
मनुष्य बनता है। 

*
बदलाव 
पहले पगडण्डी 
शहर से 
गांव की तरफ आती 
अब सड़क
गांव से 
शहर की तरफ जाती। 



Saturday, April 25, 2026

मैं बुड्ढा कब होता हूँ

जब बच्चे मेरी बात
नहीं सुनते हैं,
और मेरी ही गलतियां 
निकालने लगते हैं।

तब मैं चुप रह कर 
उनकीु बातें सुन लेता हूँ, 
और ग्लानि से नयन 
निचे कर लेता हूँ। 

मैं शर्मशार होकर 
माफ़ी माँग लेता हूँ,
और बिना किसी तर्क के 
मुकदमा हार जाता हूँ। 

इन घटनाओं से 
मैं उम्र को लांघ जाता हूँ,
और समय से पहले ही 
बुड्ढा हो जाता हूँ। 

मरने के बाद क्या ?

मरने के बाद क्या ?
इसका उत्तर 
आज तक नहीं मिला। 

यह प्रश्न सदा ही 
अनुत्तरित रहा 
इसका रहस्य 
आज तक नहीं सुलझा। 

साधक खोज करते रहे 
प्रत्येक नचिकेता 
उत्तर ढूंढता रहा
मगर सत्य छुपा रहा। 

क्या उम्मीद करें कि 
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
रुद्ध द्वार खोलेगा ?
इस छुपे रहस्य को 
उजागर करेगा ?


Saturday, March 28, 2026

किसी को नहीं पता

काश होता अमीर
अगर पिता 
अच्छा वर मिलता। 

आँखे हुई सजल 
डोली चढ़ी जो 
वो बेटी थी उसकी। 

किसी को मत कहो 
कड़वा तीखा 
जो मिले पीते रहो। 

बेतहाशा भागते
मंजिल कहाँ 
किसी को नहीं पता। 


सबसे छुपा कर

उसके संग में 
खूबसूरत 
होता मेरा सफर। 

मेरे सुख दुःख के 
हर पल में 
सदा साथ निभाती। 

मधुर मुस्कान 
रसरंजित 
कर देती मन को। 

सुनहरी रातें हैं  
सपने नहीं 
चुरा कर ले गई। 

उसका सुखमय  
भुजबंधन 
याद रहेगा सदा।