नन्द-यशोदा के -- सलौने गोपाल
वासुदेव-देवकी के -- बिछड़े लाल
गोप-ग्वालों के -- नटखट नन्दलाल
सांदीपनि के -- सर्वगुण सम्पन शिष्य
सुदामा के -- परमप्रिय सहपाठी
उद्धव के -- परमप्रिय मित्र
अर्जुन के -- प्रिय सखा
द्रोपदी के -- प्रिय सखी
गोपियों के -- प्रेम के अवतार
राधा के -- प्राणों के आधार
कंस के -- महाकाल
कुब्जा के -- प्रेम की वरमाल
अनेको रस थे कृष्ण मे,
इसीलिए रसराज कहलाये।