बच्चे जब मेरी बातें
नहीं सुनते और
मेरी कही बातों पर
मुझे ही सुनाते हैं
तब मैं चुप रह कर
उनकीु बातें सुन लेता हूँ,
और अपनी ही नजरों में
गुनहगार हो जाता हूँ।
मैं शर्मशार होकर
माफ़ी माँग लेता हूँ,
और बिना किसी तर्क के
मुकदमा हार जाता हूँ।
इस घटना से मेरी उम्र
दस साल बढ़ जाती है,
और मैं सचमुच में
बुड्ढा हो जाता हूँ।