पुतिन / जेलेन्सकी समझो
अब संघर्ष रुकना चाहिए,
चारों तरफ,खौफ का मंजर
अब तो इस से त्राण चाहिए।
दुर्गंध और दर्द भरी चीखें
क्या माँस के लोथड़े चाहिए,
भूख से तड़फते नन्हें बच्चे
ऐसी क्रूरता तो नहीं चाहिए।
निरीह प्राणों का क़त्ल नहीं
इन्शानियत की जीत चाहिए,
बारूदी गंध में बहुत जीलिए
अब तो हवा में सुगंध चाहिए।
दानवता से दुखिः मन को
मानवता का भाव चाहिए,
जीवो ओर जीने दो सबको
सद्भावना का जीवन चाहिए।
बहुत देख लिए युद्ध धरा ने
अब तो प्यार,सौहार्द चहिए,
हैवानियत तो बहुत देख ली
अब धरा पर शांति चाहिए।
दुर्गंध और दर्द भरी चीखें
ऐसा युद्ध तो नहीं चाहिए,
भूख से विलाप करते बच्चे
ऐसी क्रूरता तो नहीं चाहिए।