Wednesday, February 4, 2026

पुतिन / जेलेन्सकी समझो

पुतिन / जेलेन्सकी  समझो 
अब विनाश रुकना चाहिए, 
चारों तरफ,खौफ का मंजर
अब तो इस से त्राण चाहिए।  

निरीह प्राणों का क़त्ल नहीं 
इन्शानियत की जीत चाहिए,
बारूदी गंध में बहुत जीलिए 
अब तो हवा में सुगंध चाहिए। 

दानवता  से  दुखिः मन को 
मानवता  का   भाव चाहिए,
जीवो ओर जीने  दो सबको 
सद्भावना का जीवन चाहिए। 

बहुत देख लिए युद्ध धरा ने 
अब तो प्यार,सौहार्द चहिए,
हैवानियत तो बहुत देख ली 
अब  धरा पर शांति चाहिए।