Saturday, March 28, 2026

किसी को नहीं पता

काश होता अमीर
अगर पिता 
अच्छा वर मिलता। 

आँखे हुई सजल 
डोली चढ़ी जो 
वो बेटी थी उसकी। 

किसी को मत कहो 
कड़वा तीखा 
जो मिले पीते रहो। 

बेतहाशा भागते
मंजिल कहाँ 
किसी को नहीं पता। 


सबसे छुपा कर

उसके संग में 
खूबसूरत 
होता मेरा सफर। 

मेरे सुख दुःख के 
हर पल में 
सदा साथ निभाती। 

मधुर मुस्कान 
रसरंजित 
कर देती मन को। 

सुनहरी रातें हैं  
सपने नहीं 
चुरा कर ले गई। 

उसका सुखमय  
भुजबंधन 
याद रहेगा सदा।