काश होता अमीर
अगर पिता
अच्छा वर मिलता।
आँखे हुई सजल
डोली चढ़ी जो
वो बेटी थी उसकी।
किसी को मत कहो
कड़वा तीखा
जो मिले पीते रहो।
बेतहाशा भागते
मंजिल कहाँ
किसी को नहीं पता।
उसके संग में
खूबसूरत
होता मेरा सफर।
मेरे सुख दुःख के
हर पल में
सदा साथ निभाती।
मधुर मुस्कान
रसरंजित
कर देती मन को।
उसका सुखमय
भुजबंधन
याद रहेगा सदा।
सुनहरी रातें हैं
सपने नहीं
चुरा कर ले गई।