Friday, June 5, 2026

नज़रिया और बदलाव

जीवन 
मरघट तक का 
सफर है 
जहाँ  सिर्फ शवों का 
इन्तजार है। 
  
*
अन्तर 
कानों से सुनी राग 
मधुर होती है 
मगर अनहद नाद 
मधुरतम होती है। 

*
संसार 
जहाँ मनुष्य कभी 
ईश्वर बनता है 
और कभी ईश्वर 
मनुष्य बनता है। 

*
बदलाव 
पहले पगडण्डी 
शहर से 
गांव की तरफ आती 
अब सड़क
गांव से 
शहर की तरफ जाती।