Tuesday, February 17, 2026

शुभ्र देवी सरस्वती माता

हंस सवारी करती माँ 
वीणा धारण करती माँ। 

सबका ज्ञान बढ़ाती माँ
सब को बुद्धि  देती माँ। 

अन्धकार को हरती माँ  
सबको राह दिखाती माँ।  

अज्ञान मिटाती मेरी माँ
सन्मार्ग दिखाती मेरी माँ। 

ज्ञान प्रदायनी मेरी  माँ 
शुभ वरदायिनी मेरी माँ। 

वीणा रस बरसाती माँ 
संगीत सिखाती मेरी माँ। 










Friday, February 13, 2026

आभार

तुम्हारी यादें 
तुम्हारी बातें 
तुम्हारे शब्द 
मुझे मजबूर करते हैं 
बार-बार लिखने के लिए। 

कलम अपने आप 
चलने लगती है 
जैसे कोई 
हाथ पकड़ 
लिखवा रहा हो। 

महसूस करने लगता हूँ 
तुम्हें अपने अंदर 
अपने पास में 
अपने सामने 
और अपने चारों तरफ। 

तुम्हारी यादें ही अब 
मेरी अमानत है 
जिन्हें संजोकर रखता हूँ 
और जिंदगी के सफर में 
लिखता रहता हूँ। 


Wednesday, February 4, 2026

पुतिन / जेलेन्सकी समझो

पुतिन / जेलेन्सकी विचारो 
अब  संघर्ष  रुकना चाहिए, 
चारों तरफ मौत का मंजर
अब तो इस से त्राण चाहिए।  

दुर्गंध  और  दर्द भरी चीखें
धरती पर अब नहीं चाहिए, 
भूख से  तड़फते नन्हें बच्चे 
ऐसी क्रूरता तो नहीं चाहिए। 

निरीह  प्राणों का क़त्ल नहीं
विश्व बंधुत्व का भाव चाहिए,
अंगारों से धधक रही दुनिया 
अब दुनिया को शांति चाहिए। 

दानवता  से  दुखी  मन को  
धर्म, शान्ति, न्याय   चाहिए,
जीवो ओर जीने  दो सबको 
मानवता  का  भाव चाहिए। 

बहुत देख लिए युद्ध धरा ने 
अब तो प्यार,सौहार्द चहिए,
हैवानियत तो बहुत देख ली 
अब चमन में शांति चाहिए।