Friday, March 13, 2020

सगळा री आस ( राजस्थानी कविता )

आज म्हारी आंख्यां
तरसती रही थारे मुखड़े री
मुळक देखण ताईं 

आज म्हारा होठ
तरसता रिया तनै
दिल रो दरद बताणे ताईं

आज म्हारा कान
तरसता रिया थारा
मीठा बोल सुणणे ताईं

आज म्हारो तन
तरसतो रियो तनै हैत स्यूं
गळे लगाण ताईं

आज म्हारो मन
तरसतो रियो थार सागै
प्यार री दो बातां करणे ताईं

पण थूं तो
गया बाद पाछी
बावड़ी ही कोनी

काश !
थूं ऐकर आ ज्यांवती
तो सगळा री आस
पूरी हो ज्यांवती।





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