Wednesday, November 23, 2022

मैं रहा अकेला राहों में

सुख गया जीवन उपवन, रहा कभी जो हरा-भरा
सारे मौसम लगते फीके, मैं रहा अकेला राहों में।

तुम थी मेरी जीवन साथी, तुम थी जीवन आधार
मूरत बैठी मन मंदिर में, मैं रहा अकेला राहों में।

मैंने आँखों में डाला, जीवन सपनों का काजल
कारवां तो गुजर गया, मैं रहा अकेला राहों में।

सातों कसमें खाकर, तुम साथ निभाने को आई
बीच राह में वादा तोड़ा, मैं रहा अकेला राहों में।

दुःख मेरा क्या बतलाऊँ, दिल रोता है रातों में
यादों की बैसाखी संग, मैं रहा अकेला राहों में।

गीत अधूरे छूटे मेरे, अब क्या ग़मे बयान करूँ
सरगम टुटा जीवन का, मैं रहा अकेला राहों में।

Saturday, November 19, 2022

कैसे उसका हिसाब लिखूँ ?

नारी ने घर का काम किया 
वहाँ क्या खोया-क्या पाया  
क्या सुख-दुःख भोगा लिखूँ  
कैसे उसका हिसाब लिखूँ ? 

कितनी बार चूल्हा जलाया 
कितनी रोज रोटियाँ बेली 
क्या बच्चों के टिफिन लिखूँ 
कैसे उसका हिसाब लिखूँ ? 

कितनी बार खाना परोसा 
कितना ठंडा-बासी खाया
क्या पानी भरने का लिखुँ
कैसे उसका हिसाब लिखूँ ?  

कितनी बार झाड़ू लगाया 
कितना बर्तन साफ़ किया 
क्या कपड़ों का धोना लिखुँ
कैसे उसका हिसाब लिखूँ ? 

कितना बिस्तर रोज लगाया
कितने जन रूठों को मनाया 
क्या बच्चे जन्म पीड़ा लिखूँ 
कैसे उसका हिसाब लिखूँ ? 
  
कितना उसका वेतन लिखूँ 
कितना ओवरटाइम लिखूँ 
क्या दाम्पत्य का मोल लिखूँ 
कैसे उसका हिसाब लिखूँ ? 


Tuesday, November 15, 2022

ध्यान की नई पद्धति

आप अपने 
आप से हट कर 
दूसरे के बारे में सोचें 
पूरी तरह से दूसरे में 
रुचि ले। 

उस पर 
तरह- तरह से शक करें 
शक की निगाह से देखें 
शक को पैदा करें। 

थोड़ी देर बाद 
आप देखेंगे कि आप 
अपने आप से दूर हो गए 

आप का मन 
इस समय पूरी तरह से 
दूसरे में रूचि ले रहा है 

अब आप
आनंद का अनुभव 
कर रहे हैं 
आप जब तक चाहे 
इस अवस्था में बैठे रहें 

जब आप को 
समाधि से उठना हो 
आप अपने आप से कहें 
"जाने दो अपना क्या लिया"

और इसके साथ 
अपने दोनों हाथों की 
हथेलियों को रगड़ कर 
अपनी आँखों पर रख लें 

आप अनुभव करेंगे 
कि आप का मन 
अखंड आनंद से 
अभिभूत हो गया है। 


  



Monday, November 14, 2022

आकाश उसी का होता है

आकाश उसी का होता है 
जो वहाँ उड़ान भरता है, 
समुद्र उसी का होता है  
जो वहाँ दोहन करता है। 

सूरज उसी का होता है 
जो उससे ऊर्जा लेता है, 
चाँद उसी का होता है 
जो वहाँ तक पहुंचता है। 

सौरभ उसी की होती है 
जो उसे ग्रहण करता है, 
आनंद उसी का होता है 
जो उसे अनुभव करता है। 

स्वप्न उसी का होता है 
जो उसको देखता है,
मंजिल उसी की होती है 
जो वहाँ पहुँचता है।   


Friday, November 11, 2022

चौकड़ी भरती

चौकड़ी भरती 
चली आती तुम्हारी यादें 
कस्तूरी मृग की तरह। 

मार छलाँग 
गुम हो जाता चैन 
खरगोश की तरह। 

फुर्र हो जाती नींद 
चिड़ियों की तरह। 

यादों संग 
धड़कता दिल 
मेघों की तरह।  

शब्दों से परे 
मन में उमगते भाव 
सरिता की तरह। 

महक उठती 
प्यार भरी यादें 
खुशबू की तरह। 

उमड़ पड़ता 
निश्छल प्रेम 
लहरों की तरह। 

दिल में बसी  
प्यारी मुस्कराहट 
खुशबू की तरह। 

काश ! 
तुम ही चली आती 
चौकड़ी भरती
यादों की तरह। 




Saturday, October 15, 2022

छपने के लिए भेजें

मैंने समाचार पत्र में
एक कविता भेजी 
सधन्यवाद के साथ -
संपादक महोदय ने लिखा-
आप की कविता प्रकाशन 
योग्य नहीं। 

भेजना हो तो चटपटा 
समाचार लिख कर भेजें। 
सनसनी खोज खबर भेजें
जो सुबह चाय के साथ 
गरम मसाले का काम करे। 
आज कल कविताएं पढ़ता कौन है? 

आप लिखेंगे देश प्रेम पर 
देश की ख़ुशहाली पर 
वीर रस, भक्ति रस या 
श्रृंगार रस पर। 
इन सबसे समाचार नहीं बनते। 
छपने के लिए सनसनी फैलाएं।
मसलन 
पेड़ पर लटकता शव
टुकड़ों में कटी लाश 
बम धमाके से मरा व्यक्ति  
ऐसी घंटनाएं ढूंढे 
इन्हें सनसनीखेज बना 
छपने के लिए भेजें। 

बेटे ने की पिता की हत्या 
दहेज़ के लिए बहू की हत्या 
नाबालिका की रेप के बाद हत्या 
ऐसी घटनाएं खोजें  
इन्हें दर्दनाक बना 
छपने के लिए भेजें। 

गायों की तस्करी
मादक पदार्थों की जब्ती 
आतंकियों की गिरफ्तारी 
ऐसी जासूसी खबरें खोजें 
इन्हें रहस्यमय बना कर 
छपने के लिए भेजें। 

पूजा स्थलों में तोड़-फोड़ 
दो साम्प्रदायों में लड़ाई 
विस्फोटक बरामद 
ऐसी ख़बरों को खोजें 
नमक मिर्च लगा कर 
छपने के लिए भेजें। 

समाचार बनाने वालों का 
पीछा करते रहें 
नहीं मिले तो उनकी तलाश करें 
उन्हें उकसाएं 
जैसे ही कोई खबर बने 
छपने के लिए तत्काल भेजें। 

कविता को अभी विराम दें 
पहले थोड़ी नफरत बांट दें। 





इस देश को अब फिर से, विश्व गुरु बनाओ।

अहंकार को त्याग कर, भक्ति  भाव जगाओ।
मर्यादा को अपना कर, मानव -धर्म निभाओ। 
स्वार्थ-भाव को दूर कर, जन सेवा अपनाओ। 
युवाओं को राह दिखा कर, राष्ट्रभक्त बनाओ। 
इस देश को अब फिर से, विश्व गुरु बनाओ। 

लोभ-लालच दूर कर, देश को समर्थ बनाओ।
क्लेश -कटुता दूर कर, स्वदेशी भाव जगाओ।   
उत्साह संग आगे बढ़, देश का मान बढ़ाओ।
सर्वे भवन्तु सुखिनः संग, सबको सुखी बनाओ। 
इस देश को अब फिर से,  विश्व गुरु बनाओ। 
 
भोगवाद को दूर कर,सदाचार को अपनाओ।          
आत्म निर्भरता प्राप्त कर,सम्पन देश बनाओ। 
अनुशासन का पालन कर,आगे बढ़ते जाओ। 
वसुधा कुटुम्बकम कह, सबको गले लगाओ।          
इस देश को अब  फिर से, विश्व गुरु बनाओ। 

भेद - भाव को दूर कर, शिक्षा दीप जलाओ।                          
मोह-वासना त्याग कर, नैतिकता अपनाओ। 
सेवा में समरस होकर, परहित भाव जगाओ।
सभी सुखी हो सभी निरोगी,ऐसा देश बनाओ। 
इस देश को अब फिर से, विश्व गुरु बनाओ।