Saturday, August 8, 2026

रसराज

नन्द-यशोदा के -- सलौने गोपाल 
वासुदेव-देवकी के -- बिछड़े लाल 
गोप-ग्वालों के -- नटखट नन्दलाल 

सांदीपनि के -- सर्वगुण सम्पन शिष्य 
सुदामा के -- परमप्रिय सहपाठी 
उद्धव के -- परमप्रिय मित्र 

अर्जुन के -- प्रिय सखा 
द्रोपदी के -- प्रिय सखी 

गोपियों के -- प्रेम के अवतार 
राधा के -- प्राणों के आधार 

कंस के -- महाकाल 
कुब्जा के -- प्रेम की वरमाल 

अनेको रस थे कृष्ण मे, 
इसीलिए रसराज कहलाये।  
 

Wednesday, July 15, 2026

राजनीति का वरण करो

राजनीति का वरण करो 
जाति-धर्म का खेल करो,
कानून को हाथ में लेकर 
न्याय-व्यवस्था मौन करो। 

रिश्वत खाओ काम करो
मंत्री  पद का भोग करो, 
दो नंबर  का पैसा आये 
उसको बाहर पार करो। 

सरकारी धन हरण करो        
अपने घर को खूब भरो, 
जनता के हम सेवक है 
इसका खूब प्रचार करो। 

कटमनी का पैसा खाओ 
जन-सेवा का नाम करो,
तोलाबाजी हक़ तुम्हारा 
जनता को गुमराह करो। 


 








Thursday, June 25, 2026

विस्मय

       कानून 
एक को मारने वाला 
जेल की सलाखों 
के पीछे मिलेगा,
मगर हजारों की 
मौत का जिम्मेदार 
फाइव स्टार होटलों में 
युद्ध विराम और 
शांति समझौता 
करता मिलेगा। 
       **

     चाहत 
पेड़ की चाहत
ठंडी बहती हवा
उसके पास ठहर जाए,
मगर हवा की चाहत
पेड़ उसके बाहुपाश में
बँध जाए।
              **

       सुबह 
आजकल
सूर्योदय के बाद भी
घरों में सुबह नहीं आती,
वो आठ बजे
चाय की खनक
सुनने के बाद ही
सुबह का आभास देती।
        **
   
         बंशी
श्याम की बंशी पर
राधा का मन-मयूर
नाचने लगा,
मगर मीरा की 
आँखों से
अश्रुपात होने लगा।
           **
        
नज़र 
विदेशी पर्यटक
खुश होते हैं,
लहरों संग क्रीड़ा करतीं
हेलेन, क्लोपेट्रा और डायोना को देख!
मगर मासूम बच्चे
खुश होते हैं,
सावन की पहली फुहार में
सतरंगी इन्द्रधनुष को देख!
        **

        इश्क़ 
दो प्रेमियों के बीच
जब तीसरा आता है,
तो मोहब्बत को यह गवारा नहीं होता,
मगर जब रास्ते का काँटा हटाकर
वो सोचते हैं कि जीत गए,
तब परवान चढ़ा वो इश्क़—
जेल की सलाखों के पीछे दम तोड़ता है।




Saturday, June 6, 2026

एक दशक बीत गया


तुम्हारे संग-सफर में कुछ तो जरूर था 
तेरी यादों को आज तक भुलाया न गया। 

तुम्हारी आँखों की चमक ओ शोख हंसी 
तुम्हारा नाजोअंदाज आँखों में बस गया। 

संभव नहीं जिंदगी में भूल पाउँगा कभी 
लिखना याद करने का बहाना बन गया।     

क्यों मुझे तन्हा छोड़ गई उम्र भर के लिए 
एक झलक के लिए मैं तड़पता रह गया। 

मेरे दिल की धड़कन अब भी थमी नहीं 
तुम को बिछुड़े तो एक दशक बीत गया।  













Friday, June 5, 2026

नज़रिया और बदलाव

जीवन 
मरघट तक का 
सफर है 
जहाँ  सिर्फ शवों का 
इन्तजार है। 
  
*
अन्तर 
कानों से सुनी राग 
मधुर होती है 
मगर अनहद नाद 
मधुरतम होती है। 

*
संसार 
जहाँ मनुष्य कभी 
ईश्वर बनता है 
और कभी ईश्वर 
मनुष्य बनता है। 

*
बदलाव 
पहले पगडण्डी 
शहर से 
गांव की तरफ आती 
अब सड़क
गांव से 
शहर की तरफ जाती। 



Saturday, April 25, 2026

मैं बुड्ढा कब होता हूँ

जब बच्चे मेरी बात
नहीं सुनते हैं,
और मेरी ही गलतियां 
निकालने लगते हैं।

तब मैं चुप रह कर 
उनकीु बातें सुन लेता हूँ, 
और ग्लानि से नयन 
निचे कर लेता हूँ। 

मैं शर्मशार होकर 
माफ़ी माँग लेता हूँ,
और बिना किसी तर्क के 
मुकदमा हार जाता हूँ। 

इन घटनाओं से 
मैं उम्र को लांघ जाता हूँ,
और समय से पहले ही 
बुड्ढा हो जाता हूँ। 

मरने के बाद क्या ?

मरने के बाद क्या ?
इसका उत्तर 
आज तक नहीं मिला। 

यह प्रश्न सदा ही 
अनुत्तरित रहा 
इसका रहस्य 
आज तक नहीं सुलझा। 

साधक खोज करते रहे 
प्रत्येक नचिकेता 
उत्तर ढूंढता रहा
मगर सत्य छुपा रहा। 

क्या उम्मीद करें कि 
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
रुद्ध द्वार खोलेगा ?
इस छुपे रहस्य को 
उजागर करेगा ?


Saturday, March 28, 2026

किसी को नहीं पता

काश होता अमीर
अगर पिता 
अच्छा वर मिलता। 

आँखे हुई सजल 
डोली चढ़ी जो 
वो बेटी थी उसकी। 

किसी को मत कहो 
कड़वा तीखा 
जो मिले पीते रहो। 

बेतहाशा भागते
मंजिल कहाँ 
किसी को नहीं पता। 


सबसे छुपा कर

उसके संग में 
खूबसूरत 
होता मेरा सफर। 

मेरे सुख दुःख के 
हर पल में 
सदा साथ निभाती। 

मधुर मुस्कान 
रसरंजित 
कर देती मन को। 

सुनहरी रातें हैं  
सपने नहीं 
चुरा कर ले गई। 

उसका सुखमय  
भुजबंधन 
याद रहेगा सदा। 



Tuesday, February 17, 2026

शुभ्र देवी सरस्वती माता

हंस सवारी करती माँ 
वीणा धारण करती माँ। 

सबका ज्ञान बढ़ाती माँ
सब को बुद्धि  देती माँ। 

अन्धकार को हरती माँ  
सबको राह दिखाती माँ।  

अज्ञान मिटाती मेरी माँ
सन्मार्ग दिखाती मेरी माँ। 

ज्ञान प्रदायनी मेरी  माँ 
शुभ वरदायिनी मेरी माँ। 

वीणा रस बरसाती माँ 
संगीत सिखाती मेरी माँ। 










Friday, February 13, 2026

आभार

तुम्हारी यादें 
तुम्हारी बातें 
तुम्हारे शब्द 
मुझे मजबूर करते हैं 
बार-बार लिखने के लिए। 

कलम अपने आप 
चलने लगती है 
जैसे कोई 
हाथ पकड़ 
लिखवा रहा हो। 

महसूस करने लगता हूँ 
तुम्हें अपने अंदर 
अपने पास में 
अपने सामने 
और अपने चारों तरफ। 

तुम्हारी यादें ही अब 
मेरी अमानत है 
जिन्हें संजोकर रखता हूँ 
और जिंदगी के सफर में 
चलता रहता हूँ। 


Wednesday, February 4, 2026

पुतिन / जेलेन्सकी समझो

पुतिन / जेलेन्सकी विचारो 
अब  संघर्ष  रुकना चाहिए, 
चारों तरफ मौत का मंजर
अब तो इस से त्राण चाहिए।  

दुर्गंध  और  दर्द भरी चीखें
धरती पर अब नहीं चाहिए, 
भूख से  तड़फते नन्हें बच्चे 
ऐसी क्रूरता तो नहीं चाहिए। 

निरीह  प्राणों का क़त्ल नहीं
विश्व बंधुत्व का भाव चाहिए,
अंगारों से धधक रही दुनिया 
अब दुनिया को शांति चाहिए। 

दानवता  से  दुखी  मन को  
धर्म, शान्ति, न्याय   चाहिए,
जीवो ओर जीने  दो सबको 
मानवता  का  भाव चाहिए। 

बहुत देख लिए युद्ध धरा ने 
अब तो प्यार,सौहार्द चहिए,
हैवानियत तो बहुत देख ली 
अब चमन में शांति चाहिए। 









Saturday, December 13, 2025

मन के भाव

  आनंद और उत्सव 

घर आँगन में आज, खुशियाँ आई हैं,
हर  दिल में उमंग की, लहरें छाई है,
विवाह का आज, शुभ  दिन आया है,
आनंद का उत्सव,   घर में छाया है। 

 अभिषेक के लिए

बचपन में जिसने,  मेहनत करनी सीखी,
सपने सच करने की, रीति जिसने सीखी,
वह अभि आज बना परिवार का मान है, 
मेहनत  से कमाया,  इसने बड़ा नाम है। 

नानाजी-नानीजी के लिए 

नानीजी से पाया, निशदिन प्यार अपार,
उनका स्नेह  बना,  जीवन का  आधार,
नानाजी ने मंत्र दिया, कर्म की पूजा करो,
कलाम जी ने कहा, सपनों को साकार करो।

 दादी जी के लिए 

अपनी दादीजी का,  सदा रहा तुम प्यारा,
उनकी आँखों का था, तुम एक राजदुलारा, 
मम्मी-पापा से प्यार मिला, फूलों जैसा प्यारा, 
उनके प्यार दुलार में, महका बचपन तुम्हारा। ।

संयुक्त परिवार के लिए

संयुक्त परिवार हमारा, एक सुन्दर संसार है, 
यहाँ  रिश्तों में बसता,  सब में प्यार अपार है,
प्यार भरा जीवन यहां, सच्चे सुख का भान है,
हम सब को इस पर, बहुत बड़ा अभिमान है। 

दुल्हनिया प्रियांशी के लिए

नई दुल्हनियाँ कल जब, आँगन में आयेगी,
सुख - समृद्धि के घर में, वो दीप जलायेगी,
जीवन सफर में दोनों, सबको देंगे सम्मान,
घर में खिलेगा प्रेम का, सुन्दर एक विहान। 

 नव दम्पति को आशीर्वाद

बरसे सदा आशीष मेरा, हर दिन लाए बहार,
सफल रहे जीवन तुम्हारा, मिले  सुख अपार। 
प्यार से रहना दोनों, बहती रहे प्रेम की धारा,
फूलों सा महके सदा, जीवन संसार तुम्हारा।  



त्रिपदियाँ

बचपन का प्यार भी था गुलाबी 
खत का जबाब पाने को भेजते 
संग लिफाफा भी इक जबाबी। 

बच्चे पढ़ने के नाम  विदेश जाते 
नौकरी के संग घर भी बसा लेते 
वो जीत जाते, माँ-बाप हार जाते।

लड़का देखता लड़की का सौंदर्य 
लड़की देखती लड़के की कमाई 
इतिहास गवाह,जीता सदा सौंदर्य। 

लोकतंत्र आज बन गया बाँटतंत्र 
बिक गया मुफ्त  की रेवड़ियों में  
दुनिया का सबसे  बड़ा प्रजातंत्र।



Sunday, November 16, 2025

ऐसा प्यारा अपना घर हो

लिपा-पुता जहाँ आँगन हो, 
तुलसी का पावन बिरवा हो, 
बच्चो का शोर- शराबा हो,
पायल छम-छम बजती हो, 
ऐसा प्यारा अपना घर हो।  

हर कोना उपवन जैसा हो,
चिड़ियों का मधुर बसेरा हो,
पगुराती गायें-बछरियाँ हों,
माँओं की गोद में बच्चे हो, 
ऐसा प्यारा अपना घर हो। 

आस-पास जहाँ अपने हों, 
आँखों में सुख के सपने हों, 
जहाँ प्रेम की गंगा बहती हो,
खुशियों के नित उत्सव हो, 
ऐसा प्यारा अपना घर हो। 

साँझ ढले सब संग-संग हो, 
बिरवे पर दीपक जलता हो,
भजन-आरती प्रभु वंदन हो,
हर मन में प्रेम की गंगा हो, 
ऐसा प्यारा अपना घर हो।  






Monday, November 10, 2025

मैं खुशियों भरा जीवन जी रहा हूँ।

जीवन राह पर चलते-चलते 
मैं पगडंडी पर आ गया हूँ 
अब मेरे आस-पास 
कोई जंगल 
गीत नहीं गुनगुना रहा  
कोई पहाड़ हँस नहीं रहा 
कोई नदी 
अमृत नहीं छलका रही 
कोई फूल 
मुस्कुरा नहीं रहा।    

फिर भी मैं 
हँसता, मुस्कुराता 
प्यार के गीत गुनगुनाता  
पगडंडी पर बढ़ता जा रहा हूँ। 

शहदिली मुस्कान के संग 
उदासी का उपहास उड़ाता हुआ 
मैं खुशियों भरा जीवन जी रहा हूँ। 


Saturday, October 25, 2025

निर्लिप्तता का ही ज्ञान दे रहा हूँ।

मैंने अब जीवन के सिद्धांतों से
समझौता करना सिख लिया है,
अच्छे और बुरे के बीच में अब
संतुलन रखना  सीख लिया है। 

अब हवन करने से हाथ जलते हैं,
भलाई करनेपर ठोकर मिलती है, 
किसी को भी उधार देकर देखलो,
माँगने पर दुश्मनी ही मिलती है। 

रोज़ अपहरण की घटनाऐं होती है,
गुंडागर्दी  और छुरेबाज़ी चलती है,
अबलाओं का शील हरण होता है,
सुपारी लेकर हत्याएँ की जाती हैं।

ये सब अखबार में रोज़ पढ़ता हूँ,
चाय की चुस्की संग निगलता हूँ,
मन के आक्रोश को पी जाता हूँ,
मौन रह, जख्मों को सी जाता हूँ।

जुल्म के आगे सिर झुका रहा हूँ,
यही बात बच्चों को बता रहा हूँ 
भलाई का जमाना अब नहीं रहा,
निर्लिप्तता का ही ज्ञान दे रहा हूँ। 

Wednesday, October 15, 2025

विश्व गुरु कहलायेगा

क्या रसखान सूर तुलसी 
का जमाना फिर आयेगा, 
क्या भय से पथराया जग 
फिर से प्रेम गीत गायेगा ?

क्या नफरत के समाज में 
फिर से भाईचारा आयेगा,
ढाई आखर प्रेम का बोल 
फिर से समाज में गूँजेगा। 

क्या मीरा का भक्ति-प्रेम 
तुलसी की चौपाई राजेगी,
हिंसा-घृणा की दीवार टूट 
जीवन की गरिमा गाजेगी। 

क्या सत्य अहिंसा का पथ
फिर से जीवन राह बनेगा,
मेरा प्यारा भारत फिर से
विश्व गुरु कहलायेगा। 🌼













Wednesday, September 24, 2025

बिना राग का गीत बन गया

स्वप्न संजोती हँसी तुम्हारी 
स्मृति दंश बनी जीवन का,
आज बरसने को आतुर है 
रुँधा बादल मेरे नयन का। 

तुम बिन लगती सांस अधूरी
जीवन तुम बिन सूना लगता, 
अश्रु बन बहे नयन की धारा
दर्द भरी  कवितायें लिखता।

मेरे जीवन का सावन बीता 
स्वाद सुखों के हुए  कषैले,
राहसफर में साथ जो छूटा 
ख्वाब रह गए मेरे अकेले। 

जीवन का सपना मुरझाया 
हर पथ अब वीरान हो गया, 
बिना हमसफ़र जीवन मेरा 
बिना राग का गीत बन गया।



Thursday, September 18, 2025

कश्मीर की वादियाँ

बर्फीली वादियां 
बारूद से 
दहल गई।  

पर्यटकों की 
किलकारियाँ
चीखों में बदल गईं।

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आतंकवाद के 
कहर में 
मानवता काँप उठी,

डल झील में  
चिनार की 
पत्तियाँ कहरा उठी।

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हँसता हुवा जीवन 
सिसकियों में
डूब गया,

मांग का सिंदूर 
एक पल में 
लूट गया ।

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फूलों की घाटी
आज काँटे सी
चुभ रही,

बारूदी गंध आज 
पोर-पोर में 
टीस रही । 

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