Wednesday, December 13, 2017

मेरी आँखें भर आई

सूर्य का प्रकाश
कमरे से लौट रहा है
शाम का धुंधलका
अपने पांव पसार रहा है

मैं अकेला कमरे में
लौट आया हूँ
तुम्हारे संग बिताए
दिनों को याद कर रहा हूँ

मैं अपने अकेलेपन में
तुम्हारे अकेलेपन को
ढूंढ़ रहा हूँ
तुम्हारी यादों के छोरों को
मैं अपने संग जोड़ रहा हूँ

तुम्हारी मृत्यु के साथ
थोड़ी बहुत मृत्यु मुझे भी आई है
कमरे की दीवार पर लगी तुम्हारी
तस्वीर देख मेरी आँखें भर आई है।

Friday, December 8, 2017

तुम आओगी ना

दिसंबर आ गया
तुम्हारा पश्मीना साल
अभी तक ज्यों का त्यों
रखा है अलमारी में
तुम्हें ही ओढ़ना है ना
तुम आओगी ना

ठण्ड भी बढ़ गई है
मेरा स्वेटर, मफलर
निकाल कर धुप में
तुम्हें ही देना है ना
तुम आओगी ना

सुबह उठ कर
अदरक वाली चाय बना
तुम्हें ही पिलाना है ना
तुम आओगी ना

मीठी आंच में सेंक
गरम-गरम भुट्टे
निम्बू-नमक लगा
तुम्हें ही देना है ना
तुम आओगी ना।




Wednesday, November 29, 2017

अक्सर मैं जब तनहा होता

अक्सर मैं जब तनहा होता, गीत तुम्हारे लिखता हूँ
बैठ कल्पना के पंखों पर, तुमसे मिलता रहता हूँ।

भूल हुई मुझसे जीतनी भी, मैं स्वीकार उन्हें करता हूँ
छोड़ गई मझधार मुझे तुम, यह स्वीकार नहीं करता हूँ। 

तुम तो भूल गई मुझको, पर मैं तो याद सदा करता हूँ
एक बार देखो ऊपर से, कब से तुम्हें निहार रहा हूँ।

रातों की बोझिल पलकों में, यादों के संग मैं सोता हूँ 
  सपनों की गोदी  में चढ़ कर, तुम से मिलता रहता हूँ।  

खुशबू तुम्हारी यादों की, ख़यालों में बसाए रखता हूँ
होंठों पर सजा कर मैं उनको, गुनगुनाया करता हूँ।

कैसे कहूँ मैं अपने दिल की, जो कुछ कहना चाहता हूँ 
  बिना तुम्हारे अब एक पल भी, नहीं रहना मैं चाहता हूँ।




Thursday, November 23, 2017

मुझे आज भी तुम्हारा इन्तजार है

मेरे ख्यालों में तुम थी
मेरे ख़्वाबों में तुम थी
मेरे परिहास में तुम थी
मेरे समर्पण में तुम थी
मुझे आज भी तुम्हारा इन्तजार है।

मेरी शायरी में तुम थी
मेरी कविता में तुम थी
मेरी मोहब्बत तुम थी
मेरी आराधना तुम थी
मुझे आज भी तुम्हारा इन्तजार है।

मेरी सासों  में तुम थी
मेरी बातों में तुम थी
मेरी जीवन-धारा तुम थी
मेरी प्रेम-कहानी तुम थी
मुझे आज भी तुम्हारा इन्तजार है। 

मेरी कल्पना तुम थी
मेरी भावना तुम थी
मेरी हमसफ़र तुम थी
मेरी जीवन-मंजिल तुम थी
मुझे आज भी तुम्हारा इन्तजार है। 





Monday, November 20, 2017

प्रिया मिलन को जियरा तरसे

सावन आयो बदरा बरसे
प्रिया मिलन को जियरा तरसे।

उमड़-घुमड़ कर बदरा छाए
मन में प्रिय की याद सताए
पुरवा बह के अगन लगाए
नेह - निमंत्रण याद दिलाए

सावन आयो बदरा बरसे
प्रिया मिलन को जियरा तरसे।

मयूरा नाचै सौर मचाए
पिऊ की बोली प्यार जगाए
मल्हा मेघ मल्हार सुनाए
घूँघट पट की याद दिलाए

सावन आयो बदरा बरसे
प्रिया मिलन को जियरा तरसे।

प्रिया प्रिया पपिहारी गाए
मृग-नयनी की याद सताए
मधुर कंठ से कोयल गाए
विरह-वेदना मन तड़फाए

सावन आयो बदरा बरसे
प्रिया मिलन को जियरा तरसे।



मैं आज अकेला रह गया

मेरा जीवन साथी बिछुड़ गया
          मेरा प्यार का पंछी उड़ गया
                    मैं जीवन राह में भटक गया  
                                मैं आज अकेला रह गया।  

मेरे प्यार का झरना सुख गया
         मेरा सावन पतझड़ बन गया
                     मैं मरुभूमि सा सुख गया                          
                              मैं आज अकेला रह गया।  

मेरा प्यार का मंदिर ढह गया
             मेरा गीत अधूरा रह गया 
                    मैं राह सफर में छूट गया 
                              मैं आज अकेला रह गया।  

मेरा स्वपन सलोना टूट गया
          मेरा जीवन नीरस बन गया 
                  मैं अब जीवन से हार गया
                              मैं आज अकेला रह गया।


Monday, October 30, 2017

पपैया मत ना बोल नीम री डाल रै (राजस्थानी)

पपैया मत ना बोल नीम री डाल रै
म्हारी तो मृगानैणी बसै दूरा देश रै।

कोई सामण आवै तीज रै
मेंहदी रचा दिखाती हाथ रै
पपैया मत ना बोल नीम री डाल रै
म्हारी तो मृगानैणी बसै दूरा देश रै।

कोई सामण आवै सावण रै
झूला झूलती देतो हिलौर रै
पपैया मत ना बोल नीम री डाल रै
म्हारी तो मृगानैणी बसै दूरा देश रै।

कोई सामण आवै गणगौर रै
दिखाती कर सोलह सिणगार रै
पपैया मत ना बोल नीम री डाल रै
म्हारी तो मृगानैणी बसै दूरा देश रै।

कोई सामण आवै पुष्कर मेळो रै
रंगीलो चुड़लो पेहरातो ल्याय रै
पपैया मत ना बोल नीम री डाल रै
म्हारी तो मृगानैणी बसै दूरा देश रै।