डेढ़ साल की आयशा
आँगन में खेल रही है
जब उसे भूख लगेगी
वो रोने लगेगी
जब नींद आएगी
मम्मी की गोदी में
जाकर सो जाएगी
उसे नहीं पता
उसको गोद खिलाने वाली
उसकी दादी आज उसे छोड़
सदा के लिए चली गई
सदा के लिए चली गई
जब भी कोई पूछता है
'आयशा दादी जी कहाँ है'
वो अपनी नजर और अंगुली
तस्वीर की तरफ उठा देती है
उसे नहीं याद रहेगा
उसकी दादी उसे कितना
प्यार करती थी
कैसे दिन भर
उसे गोद में उठाये
खिलाती थी
कैसे उसकी अंगुली पकड़
पार्क में घुमाने
ले जाया करती थी
अभी तो वो खेलेगी
हँसेगी, रोएगी और
रूठेगी
और हमें अपना
सारा काम छोड़
उसे गोद में लेनी होगी।
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