मैं अब किसके रंग लगाऊँ,
किसके गाल गुलाल चुराऊँ,
किसके संग करूँ ठिठोली,
बिना तुम्हारे कैसी होली?
रिमझिम रंगों की बरसातें,
रंग सब पिचकारी में डालें,
मैं किसके संग खेलूं होली,
बिना तुम्हारे कैसी होली?
जब भोली भाली सूरत ने,
मुझे रँगा था अपने रँग में,
भूला नहीं वो हसीन होली,
बिना तुम्हारे कैसी होली?
एक बार आ जाओ सजनी,
मिल कर खेलें प्यारी होली,
आलिंगन की चाह हठीली,
बिना तुम्हारे कैसी होली?