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Monday, May 11, 2020

मेरी कलम भी थर्राई है

कोरोना वायरस
दुनियाँ में कोहराम मचा रहा है, 
विज्ञान वैक्सीन नहीं खोज पा रहा है,
चीन की गलती की सजा संसार भुगत रहा है,
मानवता आज सहम कर, मज़बूरी पर घबराई है।

पुरे विश्व में
महासंक्रमण फ़ैल रहा है,
जैविक युद्ध का खतरा बढ़ रहा है,
चारों तरफ तबाही का मंजर दिख रहा है,
सारी दुनियाँ घरों में बंद, विकट स्थिति आई है।

हर इंसान बेबस
और लाचार हो रहा है,
कोविद -19 तहलका मचा रहा है,
मानव का गुमान धराशाई हो रहा है,
प्रकृति के ऊपर कोई नहीं, यह भी सच्चाई है।

कोविद महामारी ने 
दुनियाँ का चैन छीन लिया है,
हर देश मेंआज कहर बरपा रहा है, 
देश-विदेश में लाशों का अम्बार लग रहा है,
ऐसा भयावह नजारा देख, मेरी कलम भी थर्राई है।



( यह कविता "स्मृति मेघ" में प्रकाशित हो गई है। )