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Friday, July 3, 2015

मरुधर वाला देश (राजस्थानी कविता)

चालो रे साथीड़ा चाला 
मरुधर वाला देश

सावण सुरंगों लागीयो 
कोई रिमझिम बरसे मेह 
बागा बोल्या मोरिया
कोई चौमासा रो नेह।

बाजरी री नूंवी कूंपळा
गीत मिलण रा गावै,
आपाने आयोड़ा देख
हिवड़ै हरख मनावै।

मोरण, बोर, काकड़ी 
मीठा गटक मतीर 
चौमासा में घणा उडीके 
गाँव-गळी रा बीर। 

पलक बिछावै भायळा 
हिवड़े करे दुलार 
सोनळ बरणा धोरिया 
घणी करे मनवार। 

ऊँटा चमकै गोरबन्द
पग नेवर झणकार    
अलगोजा री तान पर 
घणों करे सत्कार।