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Monday, July 23, 2018

क्या खोया - क्या पाया ?

आज हमारे सम्बन्ध विच्छेद के
दस्तावेज पर न्यायाधीश ने
हस्ताक्षर कर दिया

कर्मकांडी वकीलों ने भी
हमारे रिश्ते की मृत्यु पर गरुड़
पुराण का पाठ पढ़ दिया

मैंने भी तुम्हारे प्यार का
सारा कूड़ा कचरा दिल से खुरच
कर बाहर फैंक दिया

और सुनो ! रिश्ते की कब्र पर
कफ़न गिरा एक दुखद अतित
का अन्त भी कर दिया

तुम्हारे जितने भी पत्र और तस्वीरे थी
उनको भी आज गंगा मे बहा कर
तर्पण कर दिया

लगे हाथ गंगा किनारे तुम्हारी यादों
और अहसासों का पिंडदान
भी कर दिया

दफ़न कर दिया जिन्दगी
का हर वह लम्हा जो तुम्हारे
साथ बिताया

एक लम्बे समय बाद
दिल ने आज राहत ओ सूकून
भरा दिन बिताया

सोच रही हूँ जिंदगी में
मैंने तुम्हारे साथ
क्या खोया - क्या पाया ?


  [ यह कविता "कुछ अनकही***" में प्रकाशित हो गई है। ]