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Monday, August 6, 2012

मै तुम्हे प्यार करता रहूँ




सरगम सी  खनकती आवाज हो तुम
दिल को सकून दे वो अहसास हो तुम
मै तुम्हारी कोयल सी आवाज सुनता रहूँ
मै तुम्हें प्यार करता रहूँ

अरुणिम उषा सी मन पर छायी हो तुम
मधुमास सी अमराइयाँ महकाती हो तुम
मै सोनचंपा सी याद सांसों में समाता रहूँ
मै तुम्हें प्यार करता  रहूँ

हजारों गुलों में एक गुलाब हो तुम
फूलों के गुलिस्तान की सरताज हो तुम
मै कुसुमों से अंकित आँचल छूता रहूँ
मै तुम्हें प्यार करता रहूँ

मेरे प्यार का सत्य शिव सुन्दर हो तुम
मेरी भावनाओं की संवेदना हो तुम
मै तुम्हारी आँखों में प्रीत झांकता रहूँ
मै तुम्हें प्यार करता रहूँ

मेरी जिन्दगी में बहार बन कार आयी तुम
मेरे जीवन में फागुनी त्योंहार बन खिली तुम
मै दिल के कोने में तुम्हारा नाम लिखता रहूँ
मै तुम्हें प्यार करता रहूँ ।


[ यह कविता "कुछ अनकही***" में प्रकाशित हो गई है। ]