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Sunday, September 29, 2013

नीम का पेड़


नीम के पेड़ की
शीतल बयार
शुद्ध हवा

पंछियों का बसेरा
गिलहरियों का फुदकना
चिड़ियों का चहचहाना

लल्लन का पालना
छुटकी का झुला
कोयल का घोंसला

सब मेरे देखते-देखते
अतित बन गया
पेड़ धराशाही हो गया

कुल्हाड़ी के लगते ही
पेड़ कांप उठा था
पत्ती-पत्ती सिहर उठी थी

आरे के चलते ही पेड़ में
दर्द का दरिया फुनगी से
जड़ो तक बह गया था

मेरे देखते-देखते एक
हरे-भरे पेड़ का
अंत हो गया था। 



[ यह कविता "एक नया सफर " पुस्तक में प्रकाशित हो गई है। ]