Showing posts with label कुछ दोहे. Show all posts
Showing posts with label कुछ दोहे. Show all posts

Wednesday, October 2, 2013

कुछ दोहे

सुन तू ज्यादा कमती बोल,
वरना खोलेगा अपनी पोल।

दया-धर्म की गठरी खोल,
आया बुढ़ापा आँखे खोल।

मन की बात को पहले तोल,
फिर उसको तु मुख से बोल। 

छल-कपट को मन से छोड़,
सबसे मीठी वाणी  बोल। 

दुनियां को क्यों देता दोष,
जो कहना है प्रभु से बोल। 

जो बिछुड़ा वो फिर ना मिला
फिर भी कहते दुनिया गोल। 

झंझट तुम क्यों लेता मोल,
सब की हाँ में, हाँ तू बोल। 

लोग प्रसंशा सुननी चाहते,
तू भी सबको वैसा ही बोल।