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Saturday, December 3, 2016

क्षणिकाएँ ---तुम्हारे लिए

अँखियां ढूंढें
तुमको चहुँ ओर
सजनी आओ।

तुम्हें पुकारा
आवाज लौट आई
तुम न आई।

तुम्हें बुलाने
कहाँ भेजु सन्देश 
बताओ मुझे।

दिल पुकारे
सर्द ठंडी रातों में
आ जाओ अब।

ढूंढ रही है
मेरी कविता तुम्हें
कहाँ हो तुम।

ठहर गई
मेरी जिंदगी आज
तेरे जाने से।

तुम्हें खो कर
अपना सुख चैन
खो बैठा हूँ मैं।


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