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Wednesday, June 22, 2022

मैं कविता ही लिखता रहूँ

तन्हाई के दिनों में
हमसफ़र का काम
कविता करती है।

ठंडी रातों में
गर्माहट का काम
कविता करती है। 

दुःखों के सागर में
पतवार का काम
कविता करती है। 

किसी की यादों को
गुदगुदाने का काम
कविता करती है। 

डगमगाते कदमों को
सहारा  देने का काम
कविता करती है। 

बहते आँसुओं को
पोंछने का काम
कविता करती है। 

निराशा की धुंध में
आशा का संचार
कविता करती है। 

सोते हुए को
जगाने का काम
कविता करती है। 

मैं चाहता हूँ
जीवन के अवसान तक
कविता लिखता रहूँ।


( यह कविता "स्मृति मेघ" में प्रकाशित हो गई है। )