Showing posts with label पूजा के दादी जी. Show all posts
Showing posts with label पूजा के दादी जी. Show all posts

Monday, June 6, 2016

पूजा के दादी जी

मैंने पूजा से कहा-
सुबह के नौ बज रहे हैं
अब उठ जाओ
सारी रात पढ़ती रहती हो
आँखें खराब हो जाएगी

पूजा ने करवट बदलते हुए कहा-
दादाजी आप भी कैसे उठा रहे हैं
दादी जी की तरह
वो प्यारा सा गीत गाकर उठाइए ना
"म्हारी पोती बेगी सोवै
मोड़ी उठे रेकारो मत दीज्यो जी" *

मैंने कहा-
मुझसे नहीं गया जाता
तुम्हारी दादी जी की तरह गीत
कहाँ से लाऊँ मैं वैसी सुरीली आवाज

मेरा गला भर आया
आँखें डबडबा आई
मैंने आँखों को अँगुलियों से दबाया
कहीं आँखो में आये आँसूं
पूजा पर न टपक पड़े।


*बेटी जब ससुराल जाती है तो राजस्थानी भाषा में एक गीत गया जाता है, ये उसी के बोल है।  इस गीत में ससुराल पक्ष से निवेदन किया जाता है कि -- हमारी बेटी जल्दी सोती है और देर से उठती है ,आप उसे कुछ भी मत कहना। पूजा के दादी जी उसे यह गीत सुना कर ही उठाया करती थी।