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Tuesday, November 18, 2014

पेट फूली रोटी (राजस्थानी कविता)


जीमती बगत
ओज्यूँ  याद आ ज्यावै
माँ रे हाथ री रोटी

माँ तुवां स्यूं रोटी उतार
चिंपिया स्यूं काढती खीरां
उलट- पुलट सेंकती
पेट फूली रोटी

रोटी पर घाल देंवती
घणों सारों बिलोवण रो घी
अर मुट्ठी भर शक्कर

म्है थाली में चूरतो रोटी
बणातो चूरमो
मिलाय घी अर शक्कर

दिल रे झरोखा स्यूं
आज भी कोनी बिसरी
पुराणी यादां

माँ आज भी आँसू बण
ढळबा लाग ज्यावै
चूरमा रै मिठास ज्यूँ।


OK / OK / OK