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Wednesday, February 21, 2018

करले मन की होली में

रंग प्यार का लिए खड़ा मैं
नैन बिछाए राहों में
एक बार आ जाओ सजनी
प्रीत जगाने बाहों में

चार होलियां निकल गई
बिना तुम्हारे रंगों में
एक बार आ जाओ जानम
रंग खेलेंगे होली में

यादों के संग मन बहलाया
मुश्किल बहलाना होली में
एक बार आ जाओ मितवा
धाप लगाए चंगों में

लहरों जैसा मन डोले
आज मिलन की आसा में
एक बार आ जाओ रमणी
घूमर घाले होली में

मन का भेद, मर्म आँखों का
खुल जाता है होली में
एक बार आ जाओ मानिनी
करले मन की होली में।




[ यह कविता "कुछ अनकही ***" पुस्तक में प्रकाशित हो गई है ]