मम्मी- पापा की शादी की
गोल्डन जुबली मनाई गयी थी
सबने साथ मिल कर
ढेरों खुशियाँ बाँटी थी
लेकिन आज लगता है जैसे
जीवन में सब कुछ थम गया है
जीवन की राह में एक
पूर्ण विराम लग गया है
अचानक मम्मी हमें
अकेले छोड़ कर चली गई
अपनी ईह लीला समाप्त कर
ईश्वर में विलीन हो गई
अब तो लगता है बिना मम्मी
के घर जैसे वीरान हो गया है
खुशियों से भरे जीवन में
हिमपात हो गया है
किससे जाकर कहूँ कि मम्मी
तुम्हारी बहुत याद आती है
हर पल तुम्हारी बातें मन में
आकर आँखों से अश्रु बहाती है
लेकिन कभी लगता है जैसे
मम्मी तुम हमारे पास ही हो
और हम सभी के जीवन का
पथ प्रदर्शन कर रही हो
जब तक मम्मी तुम्हारा
आशीर्वाद हमारे साथ है
जीवन में कभी पूर्ण विराम नहीं होगा
ऐसा हम सब का विश्वाश है।
नोट : यह कविता मनीष कांकाणी द्वारा लिखी गयी है। )
.jpg)