- घणा दिना रे बाद
- अबकाळै म्हैं उडाइ
- खेत मांय गोफ्या स्यूं चिड़कळ्यां
- घणा दिना रे बाद
- अबकाळै म्हैं सेक्या
- खेत मांय बाजारी रा सिट्टा
- घणा दिना रे बाद
- अबकाळै म्हैं फोड्या
- खेत मांय खुणी स्यूं मतीरा
- घणा दिना रे बाद
- अबकाळै म्हैं तोड़्या
- खेत मांय झाड़का स्यूं बोरिया
- घणा दिना रे बाद
- अबकाळै म्हैं खाया
- खेत मांय काकड़ी र काचरा
- घणा दिना रे बाद
- अबकाळै म्हैं बजायो
- खेत मांय धोरा ऊपर अळगोजो
- घणा दिना रे बाद
- अबकाळै म्हैं काढ्यो
- खेत मांय बाजारी रो खळो।
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Tuesday, January 15, 2019
घणा दिना रे बाद (राजस्थानी कविता )
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