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Saturday, August 18, 2018

भवसागर पार लगाओ

प्रभु! करुणा बरसाओ
आवागमन मिटे जीवन से
अब ऐसी भक्ति जगाओ
भवसागर पार लगाओ।

प्रभु! ज्ञानसुधा बरसाओ
मिथ्या मोह मिटे जीवन से
अब ऐसी राह दिखाओ
भवसागर पार लगाओ।

प्रभु! दिव्यधार बहाओ
कर्म के पाप कटे जीवन से
अब ऐसी लगन लगाओ
भवसागर पार लगाओ।

प्रभु! प्रेमसुधा बरसाओ
काम-क्रोध मिटे जीवन से
अब ऐसी कृपा बनाओ
भवसागर पार लगाओ।

प्रभु !शांतिसुधा बरसाओ
लोभ-मोह मिटे जीवन से
अब ऐसी कृपा बनाओ
भवसागर पार लगाओ।



( यह कविता "स्मृति मेघ" में प्रकाशित हो गई है। )