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Friday, July 12, 2013

ओळाव (राजस्थानी कविता)

दुनिया की दादागिरी रो
ठेको ले राख्यो है
अमेरीका

शांती'र नाम दुनिया में
करे जुद्ध,लड़ाव देश के लोगा ने
एक दूजा स्यूं अमेरिका

भेजे आपरी फौजा
देव नुवां-नुवां हथियार
शुरू करे अंतहीन जुद्ध अमेरिका

आभै में कांवळा दाईं
उडावै हवाई जहाज
ठोड-ठोड फैंक ब़म अमेरिका

बिना मिनखा
चाळबाळा हवाई जहाज
डरोण बरपाव कहर

आग री च्यांरा कानी उठे
लपटा, धुंवारा उठै गुब्बार
मिट ज्यावै गांव र शहर

चीखां अर चितकारा सुणीजे चौफेर
दिखै छत-बिछत हुयोड़ी ळाशा
दिन रात हुवै धमाका

चिरळी मारै घरां में
सुत्योड़ा टाबरिया
सुण र बामा रा धमाका

बरसा न बरस चाळै
शांती "र नावं पर
अशांती रो जुद्ध

मन में बैठ्या दरिंदै ने तो
कोई न कोई ओळाव चाईजै
करनै दुनिया में जुद्ध।




[ यह कविता "एक नया सफर" पुस्तक में प्रकाशित हो गई है। ]