Thursday, August 11, 2016

बम बम बोले रे काँवड़िया

सावन महीना लागा बम बम बोले रे काँवड़िया

फूलन-बसन लगा सजाई रे काँवड़िया
गंगा जी से जल भर चले रे काँवड़िया
मार्ग दुर्गम नंगे पाँव चले रे काँवड़िया
गंगा जल शंकर के चढ़ाये रे काँवड़िया,बम बम बोले रे काँवड़िया।

भोले के भंग का प्रसाद चढ़ाई रे काँवड़िया
ठंडी छाया बैठ थकान मिटाये रे काँवड़िया
राम की रसोई का प्रसाद पाये रे काँवड़िया
व्रत को सतभाव निभाये रे काँवड़िया,बम बम बोले रे काँवड़िया।

रख कंधे पर कांवड़ चले रे काँवड़िया
धुप बरसात की चिंता ना करे रे काँवड़िया
दुर्गम राह को फूल समझ चले रे काँवड़िया
राहे डगर में मस्ती से झूमें रे काँवड़िया, बम बम बोले रे काँवड़िया।

अनेक नगर ग्राम से आये रे काँवड़िया
एक रंग एक रूप बन चले रे काँवड़िया
राग-द्वेस मोह-मान छोड़ चले रे काँवड़िया
दर्शन की आश लिए चले रे काँवड़िया, बम बम बोले रे काँवड़िया।






Monday, August 1, 2016

बाल कविता

नटखट मेरा कृष्णा भैया
दिन भर करता धम्मक धैया। 

पूजा दीदी बड़ी सयानी 
लेकिन करती है मनमानी। 

राधा दीदी प्यारी-प्यारी 
बाते करती न्यारी-न्यारी। 

राहुल भैया को भाता आम
बात है कोई इसमें खास।

अभि भैया सबसे प्यारा
है सबके नैनो का तारा।

गौरव भैया एक सितारा
मुझको लगता सबसे प्यारा। 

सबसे अच्छी मेरी नानी 
रोज सुनाए मुझे कहानी। 

देखो माँ है कितनी अच्छी 
मुझे सिखाती बाते अच्छी। 

मैं मम्मी की प्यारी बिटिया 
नाचा करती ता-ता-थैया।