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Wednesday, January 3, 2018

बरस बीतग्या (राजस्थानी कविता )

सहेळ्या रो झुलरों
माथै पर घड़ो
बणीठणी पणिहारियाँ देख्या न्हं
बरस बीतग्या।

सोनल बरणा धौरा
खेजड़ी'र खोखा
मोरियाँ रो नाच देख्यां न्हं
बरस बीतग्या।

फोग'र रोहिड़ा
खेत'र खळां
मदवा ऊंटां री गाज सुण्यां न्हं
बरस बीतग्या।

बळती अर लूवां
सरदी'र डांफर
भूतियो बगुळियो देख्यां न्हं
बरस बीतग्या।

सावण रो महीणो
रिमझिम बरसतो म्है
अलगोजा पर मूमल सुण्यां न्हं
बरस बीतग्या।

आँगण मायं माण्डना
ब्याव रो राती जोगो
लुगायां रो टूंटियों देख्यां न्हं 
बरस बीतग्या।