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Tuesday, April 18, 2017

ममता की मूरत

तुम
बदली बन बरसती रही                                                                                                                       
करती रही प्यार की बरसात
सभी पर।

तुम
फूल बन महकती रही 
बिखेरती रही प्यार की खुशबू 
सभी पर।

तुम
लोरी बन गाती रही
लहराती रही प्यार का आँचल
सभी पर।

तुम
किरण बन चमकती रही
लुटाती रही चांदनी
सभी पर।

तुम
ममता की मूरत बन झरती रही
बहाती रही स्नेह की धारा
सभी पर।



 [ यह कविता 'कुछ अनकही ***"में प्रकाशित हो गई है ]