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Friday, February 26, 2016

तुमने कहा था

एक बार तुमने मुझ से कहा था-
जब मैं चिर निंद्रा में
विलीन हो जाँउगी
तो यह मत समझ लेना कि
मैं तुमसे दूर चली जाऊँगी

मुझे पाने के लिए
अपने दिल के भीतर झाँकना
मैं तुम्हें वहीं मिल जाऊँगी
मैं कहीं भी चली जाऊँ
तुम्हारे दिल में सदा बसी रहूँगी

आज तन्हाई की बेला में
मैंने जैसे ही तुम्हें याद किया
तुम चली आई मेरी यादों में
पलकों को बंद करते ही
तुम समा गई मेरे ख्यालों में

तुमने सच ही कहा था
तुम सदा मेरे दिल में बसी रहोगी
मेरे मन के अदृश्य कोने में
तुम सदा जीवित रहोगी।


 [ यह कविता "कुछ अनकही ***" में प्रकाशित हो गई है। ]