घर के बड़े-बुड्ढे
समय-समय पर
पीते रहते है
कुछ कड़वा,
कुछ तीखा,
ताकि परिवार के
रिश्तों में बची
रह सके मिठास ।
(यह कविता "कुमकुम के छींटे" पुस्तक में प्रकाशित हो गयी है )
समय-समय पर
पीते रहते है
कुछ कड़वा,
कुछ तीखा,
ताकि परिवार के
रिश्तों में बची
रह सके मिठास ।
(यह कविता "कुमकुम के छींटे" पुस्तक में प्रकाशित हो गयी है )