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Friday, January 30, 2015

बरसों बीत गए

बरसों बीत गए

तुलसी 
चौरे पर 
दीया जलाए हुए

पंजो पर बैठ
चूड़ियों से 
पानी पिए हुए

गौधूली बेला में
गायों का 
रम्भाना सुने हुए

चिड़ियों को 
बालू में
नहाते देखे हुए

मोर को 
खेतों में
नाचते देखे हुए

रात में 
तारों का 
नजारा देखे हुए

खेजड़ी की 
छाँव तले
अळगोजा सुने हुए 

सावण की 
तीज पर
झूला झूले हुए

पनघट की 
डगर पर 
पायल को सुने हुए .