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Wednesday, April 21, 2021

असमर्थों का मान

अयोध्या में हनुमान ढ़ी
हनुमान जी का प्रशिद्ध मंदिर 
अंदर भक्तों की भीड़ 
आरती और जयकारों से 
गूंजता मंदिर। 

बाहर सीढ़ियों के पास 
भिखारियों की 
लम्बी कतारें 
पंक्तिबद्ध बैठे हैं भिखारी 
सामने तसलों की कतारें। 

भक्तगण 
आते हैं बाहर 
फेंकते है चंद सिक्कें 
गिर जाते हैं 
कटोरों के भीतर-बाहर। 

मन में नहीं है भाव
कि इनको भी दें आदर से 
असमर्थों का मान भी 
बढ़ाया जा सकता है 
हाथ में देकर प्यार से। 



( यह कविता "स्मृति मेघ" में प्रकाशित हो गई है। )