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Friday, December 30, 2011

शवों की कीमत

दिल्ली फिर दहला
हाई कोर्ट के गेट पर
बम्ब ब्लास्ट हुवा

खून का तालाब जमा
लाशों का मंजर लगा
आतंकवाद का
नंगा नाच हुवा

सरकार ने
शवों की कीमत
पांच लाख लगाई

स्थाई तौर पर
विकलांगों की
दो लाख लगाईं

कोई नेता या
उसका रिश्तेदार
नहीं मरा

जो भी कोई मरा
आम आदमी
ही मरा

शवों की कीमत
आम आदमी की ही
लगाई जाती है

नेताओं के शवों
पर तो मालाएं
चढ़ाई जाती है।

(यह कविता  "कुमकुम के छींटे" नामक पुस्तक में प्रकाशित है )