शाम चार बजते ही रास्ते में देखती रहती माँ
स्कूल से आने वाले बच्चों में ढूंढती रहती माँ
जब तक मैं नहीं दिख जाता खड़ी रहती माँ
खिड़की पर खड़ी इन्तजार करती मेरी माँ।
मेरे कपड़े सीधे कर बिस्तर निचे दबाती माँ
मेरी किताबों को ठीक से थैले में सजाती माँ
मेरे टिफिन बॉक्स में अचार- पूड़ी रखती माँ
खिड़की पर खड़ी इन्तजार करती मेरी माँ।
रोज रात को सोते समय कहानी सुनाती माँ
मेरे सोने पर प्यार से बालो को सहलाती माँ
सुबह लौरी गाकर मुझे नींद से जगाती माँ
खिड़की पर खड़ी इन्तजार करती मेरी माँ।
मेरे बीमार पड़ने पर देवता को मनाती माँ
छींक आने पर रात-रात जागती रहती माँ
मेरी सिसकी-हिचकी सुन दौड़ी आती माँ
खिड़की पर खड़ी इन्तजार करती मेरी माँ।
मेरे सुख - दुःख का सदा ध्यान रखती माँ
हर समय अपनी बाहें फैलाये रखती माँ
मुझे अपने पास देख सदा मुस्कराती माँ
खिड़की पर खड़ी इन्तजार करती मेरी माँ।