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Wednesday, December 8, 2021

जवानी बीत गई

जवानी बीत गई 
बुढ़ापा आ गया है अब। 

कजरारी आँखों पर 
चश्मा लग गया है अब,
काले घुँघराले बाल 
सफ़ेद होने लगे हैं अब। 

जवानी बीत गई 
बुढ़ापा आ गया है अब। 

कानों से कम सुनाई देता 
दांत टूटने लगे हैं अब,
बढ़ते घुटनों के दर्द से 
नींद हराम होने लगी है अब। 

जवानी बीत गई 
बुढ़ापा आ गया है अब। 

रोबिली मस्ती भरी चाल 
डगमगाने लगी  है अब, 
मुस्कराहट भरे गालों पर 
झुर्रियां पड़ने लगी है अब।  

जवानी बीत गई 
बुढ़ापा आ गया है अब। 

धुरी पर रहा जीवन 
हाशिये पर आ गया है अब,
हमसफ़र बिछुड़ गए 
बीते पल याद आते हैं अब। 

जवानी बीत गई 
बुढ़ापा आ गया है अब। 

नहीं बनाओ दूरियाँ 
नजदीकियाँ बनाओ अब, 
कब थम जाए जीवन सांसे
भरोसा नहीं है अब। 

जवानी बीत गई 
बुढ़ापा आ गया है अब।