शान्तम् सुखाय
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ब्याकुल आँखें
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Thursday, December 29, 2022
व्याकुल आँखें
व्याकुल आँखें
आज भी देख रही है
राह तुम्हारी
बिस्तर में
हर करवट निकल रही है
आह तुम्हारी
व्यथित मन
आज भी चाह रहा है
छांव तुम्हारी
यादों के सागर में
बिन पतवार चल रही है
नाव तुम्हारी
जीवन की राह में
हर ठोकर पर याद आ रही है
बाँह तुम्हारी।
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