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Friday, August 13, 2021

रजनीगंधा महकाने कब आओगी ?

हे गुलाबी अधरों वाली 
मेरी रूपसि !
तुम सप्त-सुर सजाने कब आओगी।           
सावन की भीगी रातों में 
अमृत कण बरसाने कब आओगी।  

हे शबनमी नेत्रों वाली 
मेरी प्रेयसी !
तुम नेह-निमंत्रण देने कब आओगी, 
अभिलाषाओं की गलियों में 
नयनों का प्यार बरसाने कब आओगी ? 

हे मृदु कपोलों वाली 
मेरी मानिनी !
तुम प्रणय गीत सुनाने कब आओगी, 
मदभरे प्यारे मौसम में 
यौवन मदिरा बरसाने कब आओगी ?

हे कोमलांगिनी 
मेरी मोहिनी !     
तुम पायल की रुनझुन सुनाने कब आओगी।
मेरे सपनों के मधुबन में 
रजनीगंधा महकाने कब आओगी ?