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Friday, August 24, 2012

कृष्णा और बरसात




मैंने  कृष्णा को
भीगा हुवा देख कर पूछा
बरसात में छत पर
क्यों गए थे  ?

कृष्णा बाल शुलभ
नज़ाकत से बोला
दादाजी परोपकार का
काम करने गया था 

मैंने आश्चर्य से पूछा 
भला बरसात में छत पर
कौन सा परोपकार का काम
करने गए थे  ?

जब बरसात में कोई भी
नहीं भीगता तो स्वयं बरसात को
भीगना पड़ता है यही तो कल आपने
कहानी में बताया था 

कृष्णा आँखे मटकाकर बोला
अगर मै छत पर जाकर
नहीं भीगता तो स्वयं बरसात को
भीगना पड़ता

इसलिए मै छत पर भीगने चला गया
अब कम से कम  बरसात को
भीगना तो नहीं पड़ेगा
दादाजी। 

[ यह कविता  "एक नया सफर " में प्रकाशित हो गई है। ]