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Monday, September 7, 2015

बचपन सबका लौट के आया

कहाँ से सीखी इतनी बातें
कहाँ से लाई इतनी सौगातें 

                 करती बातें चटपट-चटपट 
                दौड़ी आती झटपट-झटपट 

करे शरारत आँखें  मटकाती
सबको तिरछी नजर दिखाती

                  पापा   के  कंधे चढ़ जाती 
                 माँ के आँचल में छुप जाती 

दादा आए सबको  कहती 
दौड़ के गोदी में चढ़ जाती 

                  लगे भूख तब रोने लगती   
                 लौरी सुन कर सोने लगती 

खुशियों से घर को महकाया 
बचपन सबका लौट के आया।