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Monday, February 3, 2014

मेरे प्यारे दादी जी

अमेरिका से मुझसे मिलने
आई मेरी दादी जी 
सुन्दर कपडे और खिलौने 
लाई मेरी दादी जी 

बड़े प्यार से मुझे सुलाएं 
मेरी प्यारी दादी जी 
लौरी गाये गीत सुनाएं 
मेरी प्यारी दादी जी 

सेंव-पपीता मुझे खिलाएं
मेरी प्यारी दादी जी 
ताजे फल का जूस पिलाएं 
मेरी प्यारी दादी जी 

लुका-छिपी का खेल खिलाएं 
मेरी प्यारी दादी जी 
मैं रूठूँ तो मुझे मनाएं 
मेरी प्यारी दादी जी। 

(आयशा १४ महीने की  हो गयी, तब उसके दादी जी ने उसे देखा है। दादी जी कहती है कि उनका बचपन लौट आया है। आयशा भी अपनी दादी जी गोदी में खूब खेलती है।)



[ यह कविता  "एक नया सफर " में प्रकाशित हो गई है। ]