तुम थी मेरी जीवन-साथी
तुम थी जीवन की आशा,
जन्म-जन्म तक साथ रहें
यह थी प्यारी अभिलाषा।
दुःख-सुख दोनों एक भाव
हमने सब संग - संग झेला,
जीवन का आनन्द उठाया
हर मौसम हँस कर झेला।
धुप-छाँव के इस जीवन में
तुमने मेरा साथ निभाया,
चारों पुत्रों को पढ़ा लिखा
तुमने उनको योग्य बनाया।
सुन्दर - सुन्दर बहुऍं आई
उनसे सदा प्रशंसा पाई,
मान - मर्यादा में रह कर
तुमने अपनी धाक जमाई।
चार पोते और तीन पोतियाँ
उनको दिनी स्नेहिल छाया,
नाम सुशीला किया सार्थक
मेरा सदा सम्मान बढ़ाया।