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Thursday, August 16, 2012

दुःख और दर्द






अपने दुःख और दर्द को
कम करना है तो दूसरों के
दुःख और दर्द को देखो

एक दिन किसी सरकारी
अस्पताल के जनरल वार्ड को
जाकर देखो

तब समझोगे दुःख क्या होता है
कैसे लोग दुःख-दर्द को साहस
और धीरज से झेलते है

उन तंग गलियों को जाकर देखो
जहाँ ठन्डे चूल्हे पर रखी खाली पतीली
से बच्चो को बहलाया जाता है

जहाँ बचपन सिसकता है लिपट कर
माँ के सीने से दूध के लिए तब
समझोगे अभाव क्या होता है

जीवन में दुःख तो सभी को होता है
किसी को कम तो किसी को
ज्यादा झेलना पड़ता है

हमें अपने दुःख-दर्द और अभाव  का
रोना छोड़ कर सामर्थ्यानुसार
दूसरों का भला करना चाहिए

जरूरतमंद की सहायता और
बीमार का इलाज कराना चाहिए
दूसरों के दुखों को बांटना चाहिए।




[ यह कविता "एक नया सफर " पुस्तक में प्रकाशित हो गई है। ]