Friday, March 25, 2016

समा जाओ मेरी बाहों में

सरसों झूम रही है खेतों में
आम्र मंजरी महक उठी है बागों में            
अनुरागी भंवरा ढूंढ़ रहा कलियों को               
कोयलियां कुक रही है कुंजों में      

       मुस्करा कर ऋतुराज 
भर रहा बसंत को बाहों में 
     रंग-रंग के फूल खिले हैं  
         आज मिलन की राहों में      
   
         बना रंगोली फूलों की   
    धरती चली दुल्हन बनने
लताऐं कर रही आलिंगन पेड़ों का            
 गौरैया फुदक रही है आँगन में        

         लौट आओ तुम भी
                         बसंत की तरह      
              आकर एक बार फिर से            


      समा जाओ मेरी बाहों में।   






Monday, March 7, 2016

सब बिछुड़ गए है

सिर्फ तुम्ही नहीं गई हो
मेरे जीवन से
बल्कि
दिल का चैन
मुस्कराते नयन
खिलखिलाती हँसी
दरवाजे की गाय
आँगन की चिड़िया
घर का आइना
रसोई की खुशबू
प्यार का संबोधन
भोर का सूरज
सब बिछुड़ गए है
मेरे जीवन से
तुम्हारे जाने के बाद।



Saturday, March 5, 2016

जिन्दगी वही थी

जिस समय को हमने
एक दूजे के साथ जिया
जिन्दगी वही थी।

भले ही उन लम्हों को
हमने हँसते हुए बिताया
या एक दूजे की बाँहों में जिया
लेकिन जिन्दगी वही थी।

भले ही उन क्षणों को हमने
हाथों में हाथ डाले बिताया
या आँखों में आँखें डाले जिया
लेकिन जिन्दगी वही थी।

भले ही उस वक्त को
हमने तुम्हारी उलझी अलकों को
सुलझाने में बिताया
या एक दूजे के पहलू में जिया
लेकिन जिन्दगी वही थी।

उगते सूरज के साथ
चमकते चाँद के साथ
टूटते तारों के साथ
जो पल हमने साथ-साथ जिये
असल में जिन्दगी वही थी।