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Sunday, November 24, 2013

आभार प्रभु आपका



हे करुणाकर
मै आपकी करुणा
   पाकर धन्य हो गया प्रभु ! 

मै निर्मल मन से
करता रहा आपसे प्रार्थना
हर समय जपता रहा  आपका नाम
कहता रहा अपने मन की बात आपको प्रभु !

सुबह शाम आपके
चरणो में अश्रु सुमन समर्पित
करता रहा और कातर स्वर से कहता रहा-
सुशीला को स्वस्थ करो प्रभु !

हे अन्तर्यामी
अपरिमित दया आपकी 
जो स्वीकार किया आपने मेरा आग्रह 
कर दिया सुशीला को स्वस्थ और निरोग प्रभु !

आज आपने मेरी
अभिलाषा को पूर्ण कर दिया
जीवन में फिर मधुमास ला दिया
  सब कुछ आपकी अहेतुकि कृपा प्रभ ! 




[ यह कविता "एक नया सफर " पुस्तक में प्रकाशित हो गई है। ]