Wednesday, October 2, 2013

अनुभव के मोती

सुन तू ज्यादा कमती बोल,
वरना खोलेगा अपनी पोल। 

मन की बात को पहले तोल,
फिर उसको तु मुख से बोल। 

छल-कपट को मन से छोड़,
सबसे मीठी वाणी  बोल। 

दुनिया को क्यों देता दोष,
जो कहना है प्रभु से बोल। 

बिछुड़ गया वो फिर ना मिला, 
हम सब कहते  दुनिया गोल। 

बेकार के झंझट क्यों लेता मोल,
सब की हाँ में तू अपनी हाँ बोल। 

लोग प्रसंशा सुननी चाहते,
तू भी सबको वैसा तोल।  

दया-धर्म की गठरी खोल,
भोर भई अब आँखे खोल।






















6 comments:

  1. कल 04/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  2. प्रेरक ,सदेश्युक्त लेखन |
    एक शेर हैं -
    Apne Mann Mein Doob Kar Pa Ja Suragh-E-Zindagi
    Tu Agar Mera Nahin Banta Na Bann, Apna To Bann
    “अजेय-असीम{Unlimited Potential}”

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  3. वाह...

    बिछुड़ गया वो फिर ना मिला,
    हम सब कहते दुनिया गोल।
    बहुत बढ़िया!!!

    अनु

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